Love kavita In Hindi लव कविता

Love kavita In Hindi

हम तुम जब मिले,
सब ख्वाब हमारे थे,
सब रंग हमारे थे…
सभी तस्वीर हमारी थी,
सभी ख्वाइशें हमारी थी,
राहे हमारी थी…
और मंजिले भी हमारी थी…
हम साथ थे,ये दुनिया हमारी थी….
पर अब जब तुम चले गये हो,
तो कहते हो….

Romantic Love Poems In Hindi

Love kavita In Hindi
Love kavita In Hindi


मेरे भी कुछ ख्वाब है,
मेरी भी कुछ ख्वाइशें है,
मेरी भी अपनी मंजिले है..
ना जाने क्यों…
मेरी तस्वीरे,तुम्हारी तस्वीरो से…
मेल नही खाती,
क्यों राहे जो हमारी थी कभी,
अब तुम्हारी मंजिलो तक नही जाती…
मैं अपनी मुठ्ठी में सब कुछ,
हमारा ले कर बैठी थी,
तुम्हारे इन्तजार में..
ना जाने कब सब,
रेत की तरह फिसल गया…
अब हमारा…हमारा ना रहा…
मेरा तुम्हारा हो गया….!!!

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सुनो जाना….
कही दूर चले जाते है…..
नही समझेगा ये समाज,
मेरे तुम्हारे प्रेम को…
इसने हमेशा ही प्रेम पर,
सवाल किये है,
उँगलियाँ उठायी है..
नही समझ सकता,
ये समाज प्रेम की,
निश्छलता को….


सुनो जान ऐ अदा..
तुमने तो हमेशा ही,
इस समाज को..
प्रेम का पाठ पढ़ाया…
फिर भी इसने प्रेम को,
इक दायरे में बांध कर,
समझते है..
इतना ही नही….
ये समाज हमें क्या समझेगा,
ये तो मीरा की भक्ति पर,
भी सवाल करते है….

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तुमने मुझे हँसना सिखाया,
उड़ना सिखाया…
तुमने ही बेरंग तस्वीरो में,
रंग भरना सिखाया….
सब जब मैं तुम जैसी हो गया हूँ,
तुममे ही…तुम तक…दुनिया मेरी है…
तुम्हारा हाथ थाम कर,
तुम्हारे ही सफर पर चल कर,
तुम्हारी ही मंजिल पर आ गया हूँ…
तुम्हारी पहचान लिए,


तुम्हारा नाम लिए,तुम संग साथ चलता हूँ…
डरता हूँ,तुमसे हाथ न मेरा छूट जाये,
मैं खो जाऊं ना तुमसे…
कोई पूछे जो नाम मेरा,
मैं नाम तुम्हारा ही लेता हूँ..
तुमको ही मैंने अपना माना,
मेरा क्या है?
तुम ही तो मेरे हो…..

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आज चाँद हठ करके के बैठा है,
मेरी खिड़की पर…
कि आज मैं कविता उस पर लिखूं….
बहुत उलझन में पड़ गया हूँ,
जो खुद कविता हो,
उस पर मैं कविता कैसे लिखूं…
कहता है तुम जिस पर कविता लिखते हो,
उसे चाँद सा कहता हूँ…


और मुझ पर कुछ नही लिखते हो,
आज तो मैं तब तक नही जाऊंगा,
जब तक तुम मुझ पर….
कविता नही लिखते हो,
गर रात नही ढलेगी..
तो इल्जाम तुम पर आयेगा,
तुमने चाँद का दिल तोड़ दिया,
यही तुमको कहा जायेगा…
मैं मुस्कराता हूँ,कहता हूँ..
मैंने कब चाहा कि,


तुम मुझे छोड़ कर जाओ,
तुम मुझसे मिलने आते हो,
तभी तो इन्तजार में तुम्हारे,
खिड़की पर बैठा रहता हूँ…
अपनी सारी कविताएं तो,


तमको ही सुनाता हूँ,
तुम ही मेरी कविता वाले चाँद हो,
तुम्हारी चांदनी ना रुठ हो जाये,
तभी तो तुम्हे नही बताता हूँ….!!!