Love kavita In Hindi लव कविता

कभी उठने, कभी झुकने की अदा

अधूरे प्यार की कविता

हर तरफ़ अब यही अफ़साने हैं
हम तेरी आँखों के दीवाने हैं
कितनी सच्चाई है इन आँखों में
खोटे सिक्के भी खरे हो जाएँ
तू कभी प्यार से देखे जो उधर
सूखे जंगल भी हरे हो जाएँ
बाग़ बन जाए जो वीराने हैं
एक हल्कासा इशारा इनका
कभी दिल और कभी जाँ लूटेगा
किस तरह प्यास बुझेगी उसकी
किस तरह उसका नशा टूटेगा
जिसकी क़िस्मत में ये पैमाने हैं
नीची नज़रों में है कितना जादू
हो गए पल में कई ख़्वाब जवाँ
कभी उठने, कभी झुकने की अदा
ले चली जाने किधर, जाने कहाँ
रास्ते प्यार के अनजाने हैं

रात फलक पर ये जो माहताब है
ये फकत एक आईना ही तो है
रात आफताब को फूंक फूंक दिखलाता है
इस बात पर मटक मटक इतराता है
कभी पूरा तो कभी आधा चमकाता है
आइना भी कभी आफताब होता है?
आफताब यूँ ही नहीं बना जाता है
उसके लिए लिए दिन-रात जलना होता है

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माना के तेरे काबिल नहीं हूं मैं

माना के तेरे काबिल नहीं हूं मैं
तू मेरा शौक दे मेरा इंतजार देख
राधे राधे श्री राधे
देखा उसने एक बार था
तनु विह्वल है मन उद्वेलित
दिल भी रोया जार जार था
देखा उसने एक बार था
तब से पसरा है सन्नाटा
चुभता रहा बराबर कांटा
सूनापन व्यापा है तब से
प्रथम दृष्टि का प्रथम प्यार था
देखा उसने एक बार था
पांव थक गए चलते चलते
अरमां कितने रहे मचलते
धूप तेज पैरों में छाले
आगे दुखों का पहार था
देखा उसने एक बार था
बहुत थक गए आते जाते
सब चुप हैं कितना समझाते
एक प्रज्वलित अग्नि सदा उर


आंखों आगे अंधकार था
देखा उसने एक बार था
बैठे-बैठे प्रीति हो गई
पर बालू की भीत हो गई
लहरों पर जैसे लिखना हो
ज्यो सागर मेंउठा ज्वार था
देखा उसने एक बार था
गांव शहर कस्बा जवार मैं
धूम मची है तेरे प्यार में
हाल-ए-दिल सब देख दुखी हैं
नश्तर दिल के आर पार था
देखा उसने एक बार था
कहां छुप गए मन ले जाकर
इतनी बड़ी सजा दी क्यों कर
भटक रहा हर एक डगर पर
दर्द उठा जो बेशुमार था
देखा उसने एक बार था

love hi love

मै और हम
मै, की हम
कौन है अहम
हम नहीं मै हूँ अहम
दूर करो जल्द यह वहम
मै में झलकता है अभिमान
हम से ही बनता स्वाभिमान
मै का है बहुत ही सीमित संसार
हम से ही होता जगमग संसार
अपना तो रहा है वसुधैव कुटुंकम का संस्कार
मै से लगता है दूसरों का तिरस्कार
मै नहीं हम को पहचानों
उसमे छिपे अहम को जानो
रावण , दुर्योधन और,कंस मे था मै का अंश
लंका , कौरव और मथुरा ने झेला इसका दंश
हम से ही चलता संसार
मै से होता बंटाधार ,
हम नहीं मै हूँ अहम
दूर करो जल्द यह वहम
मै नहीं हम है अहम
मै है अकेला ,हम मे ही है दम