Love kavita In Hindi लव कविता

रोमांटिक कविता इन हिंदी

सबके दिलों पे असर करने लगा हूँ
कुछ के तो मन में घर करने लगा हूँ
ये कोई मौसम का जादू नहीं है दोस्त
आजकल खुद की कदर करने लगा हूँ।
तितलियों के पीछे क्यूँ भागना,भगाना
बेहतर है अपना ही छोटा बाग लगाना
तितली आए या न आए,खुशबू आएगी ही
थोड़ा कम में ही गुजर बसर करने लगा हूँ
आजकल…….


महफिल में अब हम दिखाई नहीं देंते
बदकिस्मती की कभी दुहाई नहीं देंते
शौक और जरूरत के बीच का रास्ता
बनाकर,अकेला ही सफर करने लगा हूँ
आजकल……..
चाक पे मिट्टी से कुछ गढ़ा नहीं था
ककहरे से ऊपर कभी चढ़ा नहीं था
दूसरों की लिखावट ही पढ़ते रहे थे
अब मन को थोड़ा साक्षर करने लगा हूँ
आजकल………


वो मेरे पास खुद ही चल के आने लगा
देश,भेष बदल के,संभल के आने लगा
सच्ची इबादत कभी बेकार नहीं जाती
अपने पे यकीन , सबर करने लगा हूँ
आजकल खुद की कदर करने लगा हूँ।

मुहब्बत है या सिर्फ अदा है
हाँ है,ना है,ना हाँ ,क्या है

मुहब्बत है या सिर्फ अदा है
हाँ है,ना है,ना हाँ ,क्या है
दिल जान दोनों परेशां है
ये समाधान है या समस्या है।
आँखें झूठ नहीं बोलती
हर शख्स कह रहा है
मैनै बस किताबें पढ़ी है
आँखें,चेहरा नहीं पढ़ा है।
हम बुद्धू हैं साफ बताओ
आखिर ये क्या माजरा है
खबर में कुछ सच्चाई भी है
या बस उड़ती हुई हवा है।
जिधर भी जाऊँ उधर हो
रही,खुसर फुसर चर्चा है
जो भी हो अच्छा लगता है
मन का आंगन महका है।
फिर भी एक धुक धुक सी
है, बुजुर्गों का मशवरा है
आग से दूर ही रहनी चाहिये
जब घर बस रहा नया है।
इन उहापोह,हाँ ना के बीच
उनका आ जाना भी लोचा है
क्या बीतती है इस दिल पे
कभी किसी ने सोचा है ?